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उत्तराखंड के राजनीति के लिए दुखद खबर,लंबी बीमारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बी सी खंडूरी का निधन

देहरादून

उत्तराखंड के राजनीति के लिए दुखद खबर,

पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बी सी खंडूरी का निधन,

लंबी बीमारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री का हुआ निधन,

पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रहे थे बी सी खंडूरी,

मेजर जनरल बी सी खंडूरी का राजनैतिक इतिहास

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी सेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में आए। उन्हें “ईमानदार राजनीतिज्ञ और राष्ट्रभक्त सेनाधिकारी” कहा जाता है।

*1. शुरुआत और सांसद कार्यकाल*
– सेना से सेवानिवृत्ति के बाद 1991 में BJP से जुड़े
– 1991 में पहली बार टिहरी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए
– 1991 से 2004 तक लगातार सांसद रहे
– 2014 में फिर गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से 1,84,526 वोटों से चुनाव जीते

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*2. केंद्रीय मंत्री का कार्यकाल*
– अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 2000 से 2004 तक केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहे
– पहले स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री, बाद में कैबिनेट मंत्री बने
– ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम NHDP को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वाजपेयी सरकार में सड़कों का जाल बिछाने के लिए उन्हें याद किया जाता है।

*3. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री*
– दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे
– पहला कार्यकाल: 2007 से 2009 तक। 2007 के विधानसभा चुनावों में BJP की जीत के बाद CM बने
– 2012 विधानसभा चुनाव में कोटद्वार सीट से चुनाव हार गए। तब BJP 31 सीटों पर रुक गई और कांग्रेस की सरकार बनी
– 7 मार्च 2012 को इस्तीफा दिया

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*4. संसदीय समिति विवाद*
– रक्षा मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष थे
– 2018 में BJP ने उन्हें इस पद से हटा कर कलराज मिश्र को अध्यक्ष बना दिया
– हटाने की वजह: मार्च 2018 में समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि रक्षा मंत्रालय को इतना कम पैसा दिया जा रहा है कि सेना की अनिवार्य जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं। खंडूरी ने रिपोर्ट में सारी बातें जस की तस रख दीं

*5. अन्य महत्वपूर्ण बातें*
– 16वीं लोकसभा में सांसद रहे और रक्षा की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष भी रहे
– 2019 लोकसभा चुनाव से पहले टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जताई थी
– उनके बेटे मनीष खंडूरी 16 मार्च 2019 को कांग्रेस में शामिल हो गए
– बेटी रितु खंडूरी भूषण यमकेश्वर से BJP विधायक हैं ।

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*खास पहचान*: सेना में 36 साल सेवा दी। अति विशिष्ट सेवा पदक AVSM से सम्मानित। राजनीति में उनका उद्देश्य “सत्ता नहीं, बल्कि सेवा” था।

 

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