देहरादून
UKSSSC की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पर फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए प्रश्न पत्रों के स्क्रीनशॉट्स ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस और आयोग की संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक परीक्षा से पहले किसी भी जिले से पेपर लीक की सूचना नहीं थी,
लेकिन परीक्षा खत्म होने के बाद लगभग 1:30 बजे यह जानकारी सामने आई कि सुबह 11:35 बजे ही सोशल मीडिया पर कुछ प्रश्न आउट किए गए थे।
जांच में पता चला कि यह फोटो सबसे पहले टिहरी में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन के पास आए। पूछताछ में सुमन ने बताया कि फोटो उन्हें खालिद मलिक ने भेजे थे, जो पहले CPWD में संविदा पर JE रह चुका है। खालिद ने अपनी बहन बताकर एक युवती के जरिए प्रश्नों के उत्तर मांगे थे, जिन्हें सुमन ने उपलब्ध भी करा दिया। सुमन ने इसकी जानकारी पुलिस को देने का प्रयास किया, लेकिन इसी बीच पत्रकार बॉबी पंवार ने उनसे स्क्रीनशॉट्स मांगे और कथित तौर पर पुलिस में सूचना न देने की सलाह दी। इसके बाद बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के ये स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए गए।
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में किसी संगठित गैंग की संलिप्तता नहीं पाई गई है। यह मामला एक सेंटर से प्रश्न पत्र के कुछ फोटो खींचकर भेजे जाने का प्रतीत होता है। रायपुर थाने में नकलरोधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें गठित की गई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नकलरोधी कानून लागू है और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं तो परीक्षा केंद्र से फोटो बाहर कैसे गए? परीक्षा की पारदर्शिता और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य बार-बार दांव पर क्यों लगता है?
