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उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती उत्सव में पहुंचे पीएम मोदी पहाड़ी बोली, पहाड़ी टोपी, पीएम का हर अंदाज पहाड़ी

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती उत्सव में पहुंचे पीएम मोदी

उत्तराखंड को देंगे 8000 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

विभिन्न प्रदर्शनी का भी किया अवलोकन

*पीएम मोदी को सुनने के लिए पहुंचे एक लाख से ज्यादा लोग*

सीएम धामी भी हैं साथ में मौजूद

मोदी-धामी की मजबूत तालमेल और विकास विज़न मंच पर साफ दिखाई दिया

अमृतकाल में ‘विकसित उत्तराखंड’ के विज़न पर जोर

एफआरआई मैदान में ऐतिहासिक भव्य आयोजन

पहाड़ी बोली, पहाड़ी टोपी, पीएम का हर अंदाज पहाड़ी*

*रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में उत्तराखंड से गहरा कनेक्ट कर गए पीएम नरेंद्र मोदी*

*इससे पहले अपने किसी भाषण में पीएम ने नहीं बोली इतनी अधिक गढ़वाली कुमाऊनी*

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*लोक पर्वों से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का जिक्र*

सिर पर पहाड़ी टोपी और भाषण में जगह-जगह गढ़वाली कुमाऊनी बोली।

उत्तराखंड के रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर अंदाज पहाड़ीपन से घुला-मिला दिखा।

उन्होंने गढ़वाली कुमाऊनी के कई-कई वाक्य बोले। वो भी कई बार। अक्सर प्रधानमंत्री उत्तराखंड के कार्यक्रमों में पहाड़ी बोली-भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं, मगर आज के भाषण में उन्होंने जितनी गढ़वाली कुमाऊनी बोली, उतनी कभी नहीं बोली थी।

ये ही वजह रही, कि उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस बार और भी गहरा कनेक्ट महसूस किया।

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प्रधानमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भाषण की शुरूआत की और कहा-देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भै बंधु, दीदी, भुलियों, दाना सयानो, आप सबू तई म्यारू नमस्कार। पैलाग, सैंवा सौंली। अपने भाषण के बीच में प्रधानमंत्री ने जब फिर से गढ़वाली में बोलना शुरू किया, तो इसने लोगों को और रोमांचित कर दिया।

प्रधानमंत्री बोले-पैली पहाडू कू चढ़ाई, विकास की बाट कैल रोक दी छै। अब वखि बटि नई बाट खुलण लग ली।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण मे पहाड़ के लोक पर्वों, लोक परंपराओं और महत्वपूर्ण आयोजनों को भी शामिल किया। इस क्रम में उन्होंने हरेला, फुलदेई, भिटोली, नंदादेवी, जौलजीबी, देवीधुरा मेले से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का जिक्र किया।

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