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सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजे के अध्यक्ष एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण उत्तराखंड के सदस्य, एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेलाकुई (देहरादून) में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सशक्त बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण- ललित जोशी

बच्चों और किशोरों को लचीलापन विकसित करने में मदद करने के लिए स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा दें-ललित जोशी

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेलाकुई (देहरादून) में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस वर्ष का विषय “सेवाओं तक पहुंच: आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य” रहा, जिसके अंतर्गत विभिन्न विद्वानों, चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव, जस्टिस सीमा डुंकराकोटी शामिल हुईं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य किसी व्यक्ति के संपूर्ण विकास का आधार है, और हमें इसे शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देना चाहिए। उन्होंने आपदाओं और आपात स्थितियों के दौरान मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए सहायता और सहानुभूति के महत्व पर बल दिया।

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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजे के अध्यक्ष एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण उत्तराखंड के सदस्य, एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में अभी भी कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि “मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है। शिक्षा संस्थानों में संवाद और जागरूकता के माध्यम से हम एक संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।”

संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य महानिदेशालय सुमित देव बर्मन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को जमीनी स्तर तक सशक्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता पहुंच सके।

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इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान डॉ प्रताप सिंह अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाने के बजाय खुले रूप से स्वीकार करना ही उपचार की पहली सीढ़ी है। उन्होंने समाज से अपील की कि मानसिक रोग से जूझ रहे लोगों के प्रति सहानुभूति और समर्थन का वातावरण बनाया जाए।

कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डा पवन शर्मा,एमओ प्रदीप राणा नर्सिंग स्टाफ, प्रशिक्षु एवं विद्यार्थियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया। नुक्कड़ नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि तनाव, अवसाद और चिंता जैसी स्थितियों में सही परामर्श और सहयोग व्यक्ति को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करता है।

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